न कर ऐसे नादानी तू , तू फिर से बिखर जाएगा। पत्थर की खोज में तू , तू मूरत को तोड़ आएगा।। न कर धोका ख़ुद से तू , तू नज़रों में फिर गिर जाएगा। दुनिया की मोह में तू , तू खुद को कहीं भूल आएगा।।