ब्यान-ए-फ़िक्र है किसी पर ऐतबार मत करना ,

इश्क़ के इस फ़िज़ा में किसी से प्यार मत करना। 

करना भी तो दिल में छुपा कर कहीं ,

भूल कर भी उनसे कभी इक़रार मत करना।

 

ज़माने का तो दस्तूर ही है खेलना, 

खुद को गेंद बना उनके हवाले मत करना।

 

अगर धोका भी मिले तो सह लेना, 

किसी बेवफ़ा के लिए आँशु जाया मत करना।