उम्मीदों से जेबें भर कर
कुछ महंगे से सपने ले कर
इस सस्ती सी दुनिया में
नींदों से समझौतें कर कर
कहा उसे तुम कुछ भी ले लो
बस कुछ दिन की आज़ादी दे दो
अब मत आना पास मेरे तुम
मुझको तुम अब माफ़ी दे दो
मंज़िल थोड़ी दूर मगर हो
कदम जो तेरे भी तत्पर हो
प्रतिज्ञा कर जब चल पड़े तू
फिर सिकन कोई न माथे पर हो
सपत लिया है तो बढ़ना होगा
गिर कर भी तुझे उठना होगा
बाधाओं को ललकार कर
हर मुश्किल से लड़ना होगा
मंज़िल के पथ पर बढ़कर
दृढ़ता की सीढियाँ चढ़कर
इस सस्ती सी दुनिया में
कुछ महंगे से सपने लेकर
तुझे तो बस अब बढ़ना होगा
गिर कर भी तुझे उठना होगा
तूफ़ान उठे या अम्बर गरजे
अब चलना बस चलना होगा
न रुकना न थामना होगा