आँखों से अपनी यूँ पलखें झुकाना।
याद आता है अक्सर तेरा मुस्कराना।
यूँ नज़रें मिला के फिर नज़रें चुराना।
फिर मुझसे ना जाने क्यों बेवजह शरमाना।
याद आता है अक्सर तेरा मुस्कराना।
हो तस्वीर कोई, या कोई हो मूरत।
चाहता हु अब तुझसे तुझी को चुराना।
हो नदियों का पानी या ठंडी हवा सी।
है तुझ बिन कही ना अब मेरा ठिकाना।
हो नगमा सा कोई, या कोई हो सरगम।
हर पल मैं चाहूँ बस तुझे ही गुनगुनाना।
तुझे याद कर के, खुद को भूल जाना।
याद आता है अक्सर तेरा मुस्कराना।

