
एक बार कहीं तुम सावन में, कुछ गीत नए से गाई थी।
उन गीतों के सरगम में, हाँ मैंने तुमको देखा है।।
इठलाती सी बेलों में, बलखाते से झूलों में,
लहरातेइन फूलों में, हाँ मैंने तुमको देखा है।।
एक रात पहाड़ों में बैठे, तुमने तारों से बातें की थी।
उन तारों की
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