सत्य ! बेपरवाह होता है ।
परवाह तो डर का नाम है ।।
सत्यनिष्ठता ! से ही डर का अंत होगा ।
डराना तो भ्रम का काम है ।।
सत्य ! अपने आप मे पूर्ण है ।
झूठ का रचा जाना आम है ।।
सत्यार्थी जो मानुस हो गया ।
डरता उसी से फ़रेबी प्राण है ।।
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1. इससे बड़ी सोच नही !
2. इससे बड़ा भाव नही !
3. सबसे बड़ा यथार्थ यही !
4. इसके बिना आप नही !
~युगल किशोर


