मैं किंचित हूँ सशंकित !

क्या कभी पूछता है भारत ?

की सीमा पर मरते जवान

खेतो में लटकते किसान

नौकरी के लिये जवानी कुर्बान

अस्पतालों में लोग बिन वायु प्राण

मैं किंचित हूँ सशंकित !

अर्थव्यवस्था की ढलान

सड़के सुनसानलड़ते हिंदू मुसलमान

जातियों में बंटते इंसान

मैं किंचित हूँ सशंकित !

कौन है महान ?

गीता,बाइबल या कुरान

बिना इनके जाने ! पढ़े ! सुने !देते सब ज्ञान,

कहते मैं हूँ महान मेरा देश है महान

तो कैसे बनूँगा मैं तुम्हारी शान ?

क्या जवाब दोगे सच्ची ईमान ?

मैं किंचित हूँ सशंकित !

की क्या कभी पूछता है भारत ?

या बस ये है धंधा तुम्हारा और

लेने में श्रेय,तुमको है महारत !

अरे न कर देश की ऐसी तिजारत

अब तुम पूछो खुद से

और दो जवाब खुद को

क्योंकि ऐ नासमझ

तुम ही हो भारत !

तुमसे है भारत !!

~युगल किशोर