माना अभी अँधेरा घना है,

पर रात के बाद ही तो दिन बना है।

माना तू अभी अकेला है,

पर अभी भी तेरा साथी उम्मीदों का मेला है।

माना तुझे अभी कोई नहीं पहचान रहा,

पर तू भी तो हार कहाँ मान रहा!

माना समय थोड़ा खेल खेल रहा है,

पर तेरा भी तो सुहाने सपनों से मेल रहा है!

माना तेरी बात कोई समझ नहीं पा रहा,

पर तू भी तो अभी कहाँ थम जा रहा।

माना तुझे किसी ने राह नहीं दिखाई,

पर तूने तो दलदल सुखाकर खुद नई राह बनाई।


तो अब क्यों थकता है!

चलता चल उसी पर, जो तेरा बनाया हुआ रस्ता है।

तुझे क्यों किसी का साथ हमेशा चाहिए!

तूने जिन लोगों का साथ दिया, उनमें से कौन है अभी तेरे साथ! 

क्या सोचता है? किसी की शक़्ल सामने नहीं आई?

यही तो जीवन है मेरे भाई!


एक ही तो साथी है तेरा हमेशा से,

दुनिया जिसको समय कहती है! बस उसी का हाथ थाम, चलता चल, समय के साथ बहता चल।

शायद लगे कभी कभी, कि रुक गया है समय अभी!

तो कभी लगे तूफ़ान सा, दौड़ रहा है समय अभी!

ऐसे में कुछ न कर, तू बस इन्तज़ार कर, उस सुबह की पहली किरण का! जिसका सपना तूने देखा था।


माना अभी अँधेरा घना है,

पर रात के बाद ही तो दिन बना है।।।