तुम्हीं निराकार हो,

तुम्हीं चैतन्य हो,

तुम्हीं महापर्व हो,

तुम्हीं साकार हो।

तुम सुरूप हो,

तुम्हीं कुरूप हो,

तुम भोले हो,

तुम्हीं विकराल हो।

मैं अधम हूँ,

मैं नीच हूँ,

मैं आम हूँ,

मैं समान्य हूँ।।

तुम्हारी कृपा बनी रहे,

इतना मेरा सरोकार है।।।