आज अचानक मैंने समय को जाना, खामोश रवैये से कुछ कुछ पहचाना, फिर ध्यान एक और ख़ामोशी का आया, समय की ही तरह जिसका आशीर्वाद मुझपे छाया, जिसका रंग रूप मैं हूँ और हूँ मैं जिसका साया, नमन नमन हाँ ये मेरे पिता हैं, जो तनिक न कम हैं माँ से वो मेरे पिता हैं, माँ ने तो बस खाना बनाकर खिलाया, पर पिता ने तो उसमे अपना खून पसीना मिलाया, हर गलत राह और बुराइओं से बचाया जिसने, बचपन से लेकर अब तक अपने पलकों पर बिठाया जिसने, कभी प्यार जताया कभी डांट लगा कर समझाया जिसने, हर गलतियों को माफ कर उसने हमेशा मुझे है अपनाया, अपनी दुःखती रगों और और ख़ामोश लबों से मुझे दुलराया, करता हूँ मैं कोटि कोटि नमन उस आत्मा को, धन्यवाद देता हूँ बार बार उस परमपिता परमात्मा को, ईश्वर करे हर जन्म मैं आपका बेटा होऊँ, सिर्फ आपके ही डाँट से ही मैं रोऊं, बनाकर मुझे अपना साया दो आशीर्वाद अपना, कि आपकी हर उम्मीद पर खरा उतर पाऊँ।