कुछ चीजें मेरे बस में होती अगर
तो मैं करना चहाता इस जन्म में
जैसे कि मैं तुम्हारे साथ घर बसा पाता
सुबह तुम्हारे लिए कॉफी बना के लाता
तुम्हारा माथा चुम के कहता
प्रिय कॉफी हाज़िर है
तुम्हारे थोड़ा और सोने की जिद्द पे
मैं तुमसे ये शिकायत कभी ना करता
कि उठ जाओ अब कॉफी ठण्डी हो जाएगी
नहीं तो दोबारा बनाने पड़ेगी
बल्कि मैं तुम्हें सोने देता
जब तक तुम अपने आप नहीं उठ जाती
और बस देखता रहता तुम्हें
तुम्हारे माथे के सुकून को ॥ - योगेश कुमार


