ना गलत वो थे, ना गलत हम, गलत तोमुक़द्दर था, जो हमदोनों के बार अक्स था,हमारी दूरी को नजदीकियोंमें लाना उसके हाथ में था,लेकिन मुलाज़मत ने भी क्या हसीन रचनारची, आज वो हमें गलत समझरहे है और हम उन्हें
ना गलत वो थे, ना गलत हम, गलत तोमुक़द्दर था, जो हम
दोनों के बार अक्स था,हमारी दूरी को नजदीकियों
में लाना उसके हाथ में था,लेकिन मुलाज़मत ने भी क्या हसीन रचना
रची, आज वो हमें गलत समझरहे है और हम उन्हें