हर चीज़ मे जिसे वह
अपनी चोंच से छूता है
धातु की ध्वनि है
कब ख़त्म हुआ सारा पानी
इतना लोहा कैसे उतर गया
कब यह जगह
जंगल से शहर हुई
उन मोटे तने का क्या हुआ
जिसके सुराख मे छुपाये थे
रानी का चोरी गया हार
फूस का सिरहाना
और एक प्रेमी का प्रेमपत्र
सोचता है कठफोड़वा
इतनी मजबूत करनी होगी चोंच
कि लोहे को कुतर सके
लुप्त होने से बचने के लिए ....।
