प्रेम! मलहम भी है और कुल्हाड़ी भी, प्रेम समय के दिए घाव भी भर देता है, लेकिन प्रेम की काट का कोई उपचार नहीं। ना धन के पास, ना शक्ति के पास, ना समय के पास; धन और शक्ति अहंकार का पर्दा डाल सकते हैं; समय इस पीड़ा को सहने का आदि बना सकता है, सब छलावा दे सकते हैं, लेकिन उपचार किसी के पास नहीं।

-रोहित