अ-किताब से ख्यालों तक
सफर करने वाली लड़की!
तेरे आम से लफ़्जों की पहनाई में जो डूबा हूँ,
गाहे - गाहे मुझको
यही इक ख़्याल आता है
तू जो आज होती
मैं तेरे दिल का कर्ब पीता
तेरे होटों पर मुक़द्दस हंसी बिखेरता
मग़र तू जो आज नही है
एक शबीह है मेरे दिल में 
मैं सरशारी में जिस पर
 सारी दुनिया के रंग गिराता हूँ
की इस तस्वीर की आँखों में
मुझे सारी दुनिया का वो नीला सय्याल दिखे
जो कभी तेरी आँखों में था
और में इसमें डूब के जी जाऊं!
-रोहित   

Twitter- @YesIRohit instagram-@yesirohit

पहनाई- विस्तार, गहराई
गाहे-गाहे  - रह-रहकर
कर्ब - दर्द
मुक़द्दस- पवित्र
शबीह- चित्र
सरशारी- पागलपन
सय्याल- तरल