जिसकी एक नज़र तुम्हे देखने को तरसती हैसोचना तो उस शख्स में कितनी संजीदगी हैतुम्हारी चाहत में जिसे भटकन हुई हो हासिलउसकी बातें, बातें, भटकन महज़ आवारगी है!?
जिसकी एक नज़र तुम्हे देखने को तरसती हैसोचना तो उस शख्स में कितनी संजीदगी है
तुम्हारी चाहत में जिसे भटकन हुई हो हासिलउसकी बातें, बातें, भटकन महज़ आवारगी है!?