नीला अम्बर

रुका समंदर

ठंडी हवा के झोंके

हर किसी के कदम रोके

लंबी जाड़े की रातें

दिन बीते जैसे-तैसे

बीते ना तन्हा रातें

कुछ काले साये

डराने आँखों तक आये

घर के अंदर रह नही सकते

बाहर भी कैसे जायें

सब अपनों से दूर

ऐसे में किसे उठाएं

कौन थपक-थपक कर सुलाए


अजीब मुसीबत चाँदनी राते

आँखों में स्वप्न ठहर जाता

लौट आती है, यादों की बारातें

ऊपर से ठंड का मंजर

क्या कहनी तेरी दिसम्बर


Twitter = @YesIRohit