विजय पर्व
हर्षित हो हम मिलकर गाएँ,
घुल-मिल विजय-पर्व मनाएं,
काम-क्रोध-मद-लोभ-मोह को-
अंतर्मन से दूर भगाएं...
हर्षित हो हम मिलकर गाएँ,
घुल-मिल विजय-पर्व मनाएं...।
ईर्ष्या और अहंकार को,
द्वेष और मानसिक विकार को,
चित्त से अति पृथक कराएं,
हर्षित हो हम मिलकर गाएँ,
घुल-मिल विजय पर्व मनाएं...।।
सहनशील और सरल बनें हम,
दया, धैर्य हो भाव बंधु सम,
आदर्श मार्ग सदा अपनाएं,
हर्षित हो हम मिलकर गाएँ,
घुल-मिल विजय पर्व मनाएं...।।
-यमुना धर त्रिपाठी

