जिसने मुझको जन्म दिया है,

पाल-पोष कर बड़ा किया है।

सही-गलत का ज्ञान कराया,

सदाचार का पाठ पढ़ाया।।


एकाकी में साथ रहे,

सिर पर जिसका हाथ रहे।

जो प्रतिपल उत्साह बढ़ाए,

संस्कार का भान कराए।।


जो अनवरत स्नेह देती है,

बदले में कुछ नहीं लेती है।

सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती है,

दुर्गा, काली, भगवती है।।


जो जीवन नैया पार लगाती,

सन्मार्ग, सत्यपथ दिखलाती।

सर्वशक्ति है, शक्तिमान है,

कोमल हृदय दयावान है।।


नमन योग्य है, श्रद्धावान है,

प्रार्थनीय है आस्थावान है।

वह प्रबल शक्ति है, पूजनीय है,

अर्चनीय है, वंदनीय है।।


-यमुना धर त्रिपाठी