
माँ का है दरबार निराला,
सबका साथी व रखवाला।
भाव-भक्ति से जो कोई ध्यावे,
दुःख कटे, सुख संपत्ति पावे।।
माँ का पावन दरबार सजा है,
भाव भक्ति से भक्त खड़ा है।
माँ का है श्रृंगार निराला,
प्रदीप्त हो रही अग्निज्वाला।।
माथे चुनरी चमक रही है,
माँ की चूड़ी खनक रही है।
ढोल-नगाड़
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