सृजनात्मक शक्ति का आभास,
शब्दों की आवृत्ति का अलंकार अनुप्रास,
अर्थ स्वत: समझ में आते!
भाव भी निरंतर निर्मित हो जाते,
हर प्रतिपुष्टि से कवि अधिक काबिल हो पाते,
चाहे प्रशंसा बंटकर ही क्यूं ना आए कवि के खाते!
थोड़ा सा उसकी रचनाओं को सहेजने के नाते,
एक प्रतियोगिता का प्रस्ताव चलो ले आते!
जिनसे कभी न होती मुलाकात,
ना वाक़िफ की कैसे हैं उनके हालात,
जो हैं शायद सात समुंदर पार,
जिनसे आंखें भी कभी न हुई हैं चार,
कवि उनसे भी कर लेते बातें!
लिखकर कटती हैं रेशम सी रातें,
प्रतिदिन प्रफुल्लित रखें अनुभव की फुहारें!
यूंही जीवन में लेखन के रस से जीवंत होती बहारें,
कल्पना का चमत्कार शोभित तथा सुहाना!
अनुभूति से संभव ख़ुशी में भी अश्रु छलकाना,
आंखों की भाषा से भावों को झलकाना,
यूंही स्मरण में सुंदर यादों का रह जाना,
मुखातिब हो सके एक दूजे से ये अनमोल खज़ाना,
रमणीय रचना को इरादे का ही बस चाहिए बहाना!
- यति
Let's worship the skill within you. ❤️


