ऐसी सुंगध तुमने कर दी समाहित मुझमें,
खुदसे रूठना गवारा नहीं,
कल मुस्कुराती सबको हंसाती,
आज फिर तुम्हारी उम्मीद का प्रेम रंग चढ़ा,
वादा?
वो तो तुमने किया था,
साथ नृत्य का,
श्रृंगार का,
रचना का,
संग परम की अर्चना का,
उस से प्राप्त तरंग का,
नए प्रयोगों का,
नए किस्सों का,
बिखरे हिस्सो को जोड़ने का,
विश्वास कर खुद को हराने का,
खुदको बेहतर बनाने का,
आवाज़ से पहले अनुभूति का,
अनुभूति से उभरे एहसासों का,
एहसासों से भरी राहत का,
राहत में बसने वाली मदहोशी का,
मदहोशी से फिर जागृत होने का,
क्षणिक विकारों पर पराजय का,
पराजय से प्राप्त जश्न का,
जश्न के उस हिस्से का,
जिसमें तुम्हारी खामोशी मैं पढूंगी,
पढ़ते पढ़ते फिर तुम्हारी याद को सलामत रखने का,
हां वादा तो किया था तुमने!
याद हैं ना?
मां
कहां हो विलीन ?
- यति

