तत्व कुछ ऐसा,

तथ्य को परखने जैसा,

बिंदु एक काला,

थोड़ा सत्व इसका निराला,

जिज्ञासा का भरता प्रतिपल प्याला!

विचारधारा हैं,

सत्य को सराहती अभिलाषा जो हैं,

ज़रा सी गफ़ल़त,

अवचेतन मन में होती कुछ हरकत,

रोज़ शनै: शनै: बरकत,

तत्व कुछ ऐसा,

गुमसुम मन को बहलाने जैसा,

आशा के पंछी की ऊंची सी उड़ान!

संकीर्ण सोच से न हो प्रयोगों का अपमान,

संकोच से ज़रा सावधान,

ना बने वो व्यवधान,

सपनों को सिकोड़ने से न बढ़ता मान,

रूठी रूह पर दिव्य सा पहरा,

मयूर का मनोहर नृत्य घने सहरा!

थोड़ा हौसले का बढ़े भीतर ज्ञान,

लिया तुमने ये सत्य सुनहरा जान?

अनमोल तथा अनगिनत सा,

संपूर्णता से विकसित सा,

कुछ मनुष्यता का हित,

कुछ प्रयास नित,

थोड़ा सत्व ऐसा!

रौशनी के पवित्र प्रसार के जैसा,

ऐसे उज्वल आसार से प्राप्त सुकून बयां हो कैसा?


- यति