अरे मेरी शक्ति,

तुझसे मैंने सीखी असल भक्ति,

यूं जीवन को तकलीफों से ना आंक,

खुदकी सहजता से अपने प्रकृति को भांप,

आपा तेरा खोता नहीं,

डर को तूने देना आलय नहीं,

संबल से तेरे स्वभाव को निखार,

मिटा दे लगता तुझे जिस भी आदत में विकार,

अरे मेरी शक्ति!

निर्वाह कर अपनी जो भीतर कला छुपी,

आवाज़ को अपनी दबा नहीं,

सुर को अपने दे एक ताल नई,

याद रख वो कोमल कली,

जो तेरे आनंद से खिली,

हर दिन तुझे जो अनुभवों में मिली,

तू शांत रह कर कितनी मज़बूत बनी,

अपने होठों से गीत गुनगुना,

बूंद बूंद नीर न बहा,

हम संग तो गहरे समुद्र की तरह,

मिटा दे अकेले बूंद बनने की जिरह।


- यति