तनिक तफ़रीह को हुआ हैं अरसा!
मन भी अब सहसा तरसा,
निकलेंगे मोटर गाड़ी पर,
चारों यार लेकर नया जुलूस,
सुमित, रजत , हरीश और पुजारी!
इनकी कहानी सुन,
राग को मिलेगी एक नई धुन!
सुमित तो संभालें हैं होटल की कमान,
रजत के पिता घरेलू क्रिकेट टीम के कप्तान,
हरीश तो खुद जेवर का व्यापारी,
पुजारी जी को तो कभी ना देखा होते अहंकारी,
चारों की शादी में होनी हैं अभी देर,
अभी मौज के बाकी दिन अनेक!
चारों को एकाएक सब जगत की चिंता,
कोई बेरोज़गारी को कोसे,
तो कोई हलवाई सी बातें परोसे!
कभी पैसों की चर्चा, कभी ज़िक्र में जेब का खर्चा,
निकली बात एक दिन जब बंट रहा था पर्चा,
उसमें था उल्लेख संगीत संग तलांशे नए सुयोग,
चारों ने सोचा क्यूं ना करके देखें कोई नया प्रयोग!
पुजारी जी स्नेह प्रिय ,आवाज़ उनकी मधुर,
हरीश की लेखनी में कोहिनूर सी प्रभा,
रजत भी गिटार बजाने में माहिर,
सुमित के मृदंग से लोग रह जाते हमेशा दंग!
सोचा चारों ने लगाए सपनों को नए पंख,
दुनिया भी याद रखे मचाए ऐसा कोई नेक हुड़दंग!
गीतों का शुरू हुआ होना रिकॉर्ड ,
तफ़रीह से संगीत के सरताज तक,
प्रतियोगिता तो जीती,जीती खुदसे भी ये जंग!
ना कसना पड़ेंगे खुद पर फिर से कभी ये तंज,
की गुमराह हुआ हमराही जो हुआ कभी स्वतंत्र!
दोस्ती तो संग निभाई ही,
उनकी यारी दुनिया पर भी जमकर प्रेम लुटाई ।
✨
- यति


