स्वाद चखा हैं?

सुगम स्वादिष्ट निवाला,

मां ने अपनी थाली से निकाला,

अपने को तपा कर तुमको निखारा,

वक़्त बे वक़्त भी तुमने रातों को उसे जगाया,

उस ने अपनी नींद का अंश भी समर्पित कर खपाया,

क्या उसने पूछा तुमसे की उसने क्या पाया?

स्तनपान कर तुमको गोद में सुलाया,

तुमने रो रोकर अपनी हर बात को मनवाया,

स्वाद चखा हैं?

जीवन के अंतिम चरण में खुदसे याद आया,

तुम्हें स्वाद उसी में मिला जो भूख के बाद प्राप्त कर खाया,

उसी ने तो इस लायक बनाया,

गीले गद्दे में खुद सोकर तुम्हें सूखे में सुलाया,

आज फिर नीर आ छलका,

खुदा का अभिनंदन तुमने उसे जो पाया,

वो चांदनी रात में लोरी सुनाती,

गुनगुनाकर तुम्हारे डर को भगाती,

खुद सहम जाए फिर भी छिपाती,

उसकी आंखो का तारा हो तुम,

संघर्ष को उसके ना नकारो तुम,

गुमसुम हैं वो क्यूंकि ज़िन्दगी का स्वाद उसने चखा,

थोड़ा अटपटा लगा तो तुम्हारे लिए बेहतर खोज के जुटाया,

अपनी द्वारका का नंद किशोर तुम्हें बनाया,

उस मां यशोदा का हर्ष तुम्हारी आत्मा में समाया।


- यति


मां " वंदना " को ये संदेश स्वर्ग में ज़रूर पहुंचाना।


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