संघर्ष के जारी हों जब दिन!
आप रहें अगर उन्हें गिन,
करते काफी कुछ आत्मसात,
शिकायत करने को न हैं कुछ शेष ज्ञात?
चंद कर लेते अपनों संग खुलकर मधुर बात,
याद आ जाता कैसे देनी चुनौतियों को मात!
कभी दर्द से भरी आंखों से हो जाती कुछ बरसात,
चेतना चैतन्य संग मिल बिखेरती फिर अंबर में इंद्रधनुष के रंग सात,
ये दिन, मौसम और हालात सब बीत जायेंगे,
हम दर्द को धुन बनाकर स्वरों संग गुनगुनाएंगे,
मुरझाए फूल पाती भी तो माटी संग मिल गए!
सीखने योग कली स्वरूप अवसर आएंगे फिर नए,
मन रहा होगा मासूमियत संग ये टटोल,
कब खुशियों का दरवाज़ा वो खोल,
रचेगा अनूठा साहित्य अनमोल,
धैर्य संग मिश्रित हर्ष देगा समाज में संपूर्ण मिठास घोल।
यति


