दूर मृगतृष्णा का भ्रम छिन्न भिन्न,
विभिन्न ख्वाहिशों की तृप्त हो प्यास,
घूम घूम सारा शहर का तिकोना बार बार,
कम से कम रास्तों की उलझन हो गई पार,
व्यापार कर रहा नारियल पानी वाला भी बेकरार,
सोचें अपना शहर छोड़ परिवार को आय का अधिक हिस्सा देगा इस इतवार,
मौहल्ले में बर्फ के गोले वाला लगा रहा ज़ोर ज़ोर दहाड़,
बच्चो के मन में पलता अतरंगी स्वाद का लाड़,
बुधवार को मंदिर में सुष्मा चड़ाई गुड़ के लड्डू,
जो बनाए उसने प्रेम से काजू किशमिश संग आटे को देकर आकर,
ना ना प्रकार के खिलौने देखकर गुड़िया उन्हें सहेजने को बेकरार,
मम्मी बोली बंद कर ज़िद घर में बुन कर दूंगी नई स्वेटर इस बार,
महीने बीत रहे व्यापार में आएगा बदलाव,
सितंबर शुरू अब पानी पूरी वाला थाल में लेकर नई चाट,
प्रेमी युगलों की भी स्ट्रीट फूड पर हाईजीन संभाल लगी लंबी कतार,
नाविक चला नई लाने को घर से अपने सुलझन देने वाली मज़बूत पतवार,
मृदु मां नई पंचतंत्र की कहानी पढ़ेंगी अपनी गुड्डी को वादा,
रात्रि होने में अब बचे सिर्फ चार घंटे काटने का इरादा।
- यति


