
पिता ने कहा कि बेटा पहला रत्न है माफी। घर-परिवार या समाज में कोई कुछ भी कहे, तुम्हे कभी भी किसी की बुरी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। कभी भी किसी से बदला लेने की भावना मत रखना। गलतियों के लिए लोगों को माफ कर देना। ये परिवार में ज़रूर ध्यान रखना।
> पिता ने कहा कि दूसरा रत्न है बुरी बातों को और अपने द्वारा किए गए भलाई के कामों को, मदद को भूल जाना। जब भी दूसरों की भलाई करो, मदद करो तो उसे याद मत रखना। इसी तरह बुरी बातें जो दुख
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