जीवन का सिद्धांत यही ,
की प्रेम संपूर्ण हो,
यकीन भी बेखौफ हो,
यादों के झरोखे हो इतने हसीन ,
की सुकून की मोहतरमा यूंही खुदको ना सिमेटे!
अपने औचित्य पे साथी तुम यूं ना भ्रांति डालो,
मौज के माहौल चंद क्षणो के परे भी आविष्कारों ,
प्रतिपल सुचारू रूप से जीवन में सौन्दर्य की बढ़ोतरी,
तुम्हारी कर्मभूमि में उसी की तो बनेगी पोथी।
अपने यहां कम हैं,
सिद्धांत यही की आलम को समझो,
मुकद्दर के मुकम्मल होने तक आलास को भी त्यागो,
अपनी पुराण पाखंडियों से ना बुझवाओ,
खुदकी पहचान तुम बस खुद ही बनाओ।
सफर में अड़चन जो आए,
इक पल ठहर के खुदको याद दिलाओ,
कहर में कोहरा अक्सर नाकामी सा अवसाद बन जाए,
तुम मगर कोहरे को असलियत के प्रकाश से ना तोलो,
जीवन का सिद्धांत यही ,
की प्रेम संपूर्ण हो,
यकीन भी बेखौफ हो,
यादों के झरोखे हो इतने हसीन ,
की सुकून की मोहतरमा यूंही खुदको ना सिमेटे!
- यति


