आनंद की मन में बहती सरिता,

सत गुणों से प्रतिभा में पारदर्शिता,

तमस के विकार विलुप्त करे दूरदर्शिता,

ज्ञात उसे रजस गुणों से बढ़ती अस्मिता!


कालिदास के साहित्य को वो हृदय से ध्याये,

कला के अखण्ड सत्य का वर्णन हिंदी में पाये,

कबीर की वाणी उसे सदैव ही सुहाए,

प्रेमचंद की अतुलनीय रचनाएं उसे लुभाएं!


वर्तमान में जीने के लिए खुद को ढ़ाला,

तप कर उभरने का ढंग उसका अत्यंत निराला,

सर्वगुण संपन्न तथा आत्मा उसकी अत्यंत प्रसन्न,

आशीर्वाद अन्नपूर्णा का, स्वादिष्ट बने उसके द्वारा अन्न!


सुंदर सुयोग की बचपन से साथ निस्वार्थी मित्र,

बालपन के अनुभव उसके विशाल तथा विचित्र!

स्याही संग भी मैत्री हुई इसी जीवन काल में,

प्रखर बनते देखा मां-पिता को हर हाल में!


- यति




Dedicated to my Parents!


❤️


:)


More Love & Light always!