सुनोगे मुझसे जीवन का सरल सार?

यहां मिलेंगे नखरे करने वाले हज़ार,

लेकिन एक बात का तुम लगाकर अनुमान,

ना करना रिश्तों में अभिमान,

त्याग , दया और करुणा का कभी ना होता व्यापार,

रख लो संबल से संतुलन की विद्या का पाठ,

नहीं हुई जो भ्रम से जन्मी इच्छा की पूर्ति आपार,

शुक्र करो खुदा ने बख्शी तुम्हारी नन्ही जान,

लिया जो समर्पण से सहजता का सौंदर्य स्वीकार,

ना होगी कभी विजय के आड़े हार की ललकार,

लेकर अपना सुशोभित तन मन बड़ते चलो तुम पथ पर,

यही हैं मेरे जीवन का सरल सा सार!

:)


- यति