संवेदना संसार को थोड़ा और बेहतर बनाती,

हर मुश्किल से गुज़र रहे हमराही को अपनाती,

कभी कोई ताना बाना बुनता रिश्तों का,

तो अविश्वास की डोर को उलझाने से रोकती,


कभी किसी से बिना कुछ चाहे अक्सर करुणा लुटाती,

वात्सल्य से ही तो वहम की खटास मिटाती,

हर सांस से खुदको भी मैं यही याद दिलाती,

संवेदना ही संसार को थोड़ा और बेहतर बनाती।


- यति


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