साहित्य में अभिरुचि का सार!
दोहे,छंद या पद्य में शब्दों की कतार,
साहित्य में छिपे ऐसे विलक्षण उपहार!
जो सदा जोड़ सकते हमारे हृदय के तार,
मिलन का उल्लास करना हो अगर व्यक्त,
सुलझानी हो गहन गुत्थी किसी भी वक्त!
काव्य में सौष्ठव और शोभा होती भव्य,
मानो जैसे अमृत सरीखा हो दिव्य द्रव्य!
अंतःकरण के कोलाहल की कलह मिट जाए,
काव्य का रसपान मानो तृप्ति और हर्ष लाए!
श्रुति द्वारा हम विविध भावों का स्पर्श पाएं,
पठन से पुलकित होकर जागरूकता आए,
बयां होते वाचन से सुंदर संयोग कई बार,
सूक्ष्म किस्सा बन जाता भाव का आधार,
हरेक विचार संजो सकता शक्ति आपार,
हर पंक्ति में छिपी होती एक अनूठी बहार!
- यती


