टिक-टिक समय का पहिया चलता हैं,
गुपचुप क्यूं तू गम सहता हैं?
हम करवट से समझ जाते आने वाले तेरे इशारे,
फिदा तुझ पर हमारी बरकत की दुआएं,
दम-दम क्यूं तेरा घुटता हैं ?
आहिस्ता-आहिस्ता थोड़ा रौशनी का प्याला लेे निराले,
ज्ञान तेरा भीतर छिपा रे,
आफत से डरने की चल अब आदत छुड़ाते,
सब्र की इंतिहा हो गई,
शीत लहर के एक झोंके में सारी चिंता उड़ाले,
अपनी दौलत शांति से प्राप्त विवेक में समाएं,
कल की क्या खबर अनगिनत अवसर तेरी राह सजाएं।
- यति


