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रोज़


आपसे तो हम रोज़ मिलते हैं,कभी खुदकी खामोशी में सरफरोश हुए,शांत मन से आपको पुकारते हैं ,इतनी शांति होती तब भीतर की आपको दी हुई पुकारकी गूंज चारो पहर शोर मचा देती,हां, आपसे तो हम रोज़ मिलते हैं ||

~यति♥️

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