रिवाज़ जो चला आ रहा,

सितम जो भला सहा जा रहा,

कब तक वो टालोगे,

बेवजह कब तक दर्द को संभालोगे?

सतह पर बहुत भ्रम हैं,

कब तक श्रम को कम आंकोगे?

सिर्फ इतना सरल तो हैं इलाज!

कौनसा तुम्हें भरना ख़ुशी की एवज में ब्याज?

सहज तुम्हारी समझ में काश आएं ये बात,

कट जाएं तुम्हारी ये कठिन सी रात,

तुम्हारे अपने तुम्हें क्यूं टोकते,

सच को क्यूं सफल होने से रोकते?

गम का क्या हैं वो आंसू तुम्हारे सब सोखते,

खुदको इतनी मेहनत से तुम प्रतिदिन झोंकते,

आज पीड़ा का रिवाज़ तोड़ो,

खुदको सही राह की तरफ मोड़ो,

कल की फिक्र कुछ देर तो छोड़ो,

आत्मा में बल को जोड़ो,

अपनी हिम्मत को मत सिकोड़ों,

तुमसे प्रेरित हो सकते ये लोग करोड़ों।


- यति




Much power to you!

❤️