क्या हफ्ते के दिन रहे गिन?
तुलना में वक़्त जा रहा छिन?
सोशल मीडिया पर पोस्ट,
प्रचलन में अफलातून रोस्ट,
तो खुद को ज़रा-सा समेट,
गैर ज़रूरी तारीफों को लपेट!
समस्त दुविधाओं को पूर्णत: भूल,
जुड़ें उससे जो आपका परम मूल,
भावों की कला सिखाते मनोहर फूल,
अध्यात्म से अहं भी हो जाता धूल!
मन को भी स्वीकारोक्ति से मिले हर्ष,
विचलित स्तिथि में ना निकालें निष्कर्ष!
वो संघर्ष के दिनों की जटिल बातें,
बेमेल अकेले काटी अनगिनत रातें!
गम में ख़ुशी की बात लग सकती पराई!
लेकिन हुनर संग मेहनत सदा ही रंग लाई,
ज्ञान भी प्रक्रिया के ज़रिए जाना निखर,
उसके लिए लाज़मी कभी जाना बिखर!
संगीत से सुप्त मन के छिड़ने दें तार,
हौसला परमात्मा आपको दें आपार!
- यति
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