सुनाऊं यारो तुमको मन की व्यथा!
जीवन में हर किसी की मैंने समझ ली कथा,
मिला उपहार में सब्र का इनाम नया!
सोचा चलो प्राथमिकता की भी आज़माएं प्रथा,
बुना लोगों ने फिर नया ताना बाना,
दिखा दी मासूमियत को भी मिल सकती सज़ा!
न जाने उनको इस वर्जन से क्या मिला मज़ा?
सुनाऊं यारो तुमको कलम से मैंने क्यूं मांगी रज़ा,
हर दफा जब इबादत से आंहें भरी,
कलम ने ही फिर अपनाया खोल बांहें अपनी,
रह रह कर यह मेरी सबसे बड़ी ताकत बनी,
आज फिर उम्मीद की आहट से आंतरिक ज्योति जली।
:)
- यति
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