मन में बहता दया का सरोवर,

हृदय में खिलते ज्ञान के पुष्प मनोहर,

असमंजस का हैं किन्तु भीषण भंवर!

बुलंद बदलावों के राज़ हैं गुप्त,

तकलीफों से ना होने देना हैं उन्हें लुप्त!

प्रत्येक को होना हैं चुस्त,

तभी सत्ता होगी दुरुस्त,

ज़रूरी हैं विश्वास का पालन!

कला का मंच से मिलन,

दिव्य विचारों का सम्मेलन!

हुनर के विकास का चलन,

वास्तविकता से अवगत होती हैं जनता!

क्या गुल खिलाएगी फिर योजनाओं की लता,

आमजन लगा लेता हैं सब पता!

मज़बूरी को ना समझो उसकी खता,

दुविधा के समक्ष कब सुविधा हारी हैं?

लगता नेताजी की विचारधारा से लुभाने की तैयारी हैं!

थोड़ा सा मिजाज़ सत्ताधारी का खुष्क,

रश्क को मिलती क्यूंकि राजनीति में जगह!

तभी प्रगाढ़ होती अविश्वास की सतह,

कामना करते हम की कम हो कलह,

मिले देश को सुषमा से संवरने की वजह,

अभी लगा हैं स्थिति पर प्रश्नचिह्न,

परिवर्तन की रेत पर लहरों से मिटते पदचिह्न।


- यति



Lift the change! ❤️