पंख लगाकर ख़्वाब उड़ते,
चंद बातों से यादों के किस्से वापस जुड़ते,
अपनेपन की बिखरती जहां सुगंध,
मन को तृप्त करते हैं ऐसे संबंध!
चाहे न हो पाता अक्सर मेल जोल,
फिर भी सहज ही मीठे होते साझा करने को बोल,
अनुपस्थिति नहीं ज़रा भी खलती,
जीवन की अग्रिम कठिनाई उनके संग ही संभलती,
प्रसून कितने प्रफुल्लित होते प्रतीत!
लगता हैं कष्ट से मुक्त हो उनका अतीत,
किंतु सत्य तो उनके धैर्य में समझ आए,
वो जो उनकी खामोशी की गुत्थी सुलझा पाए,
सिर्फ वोही जाने कितने अनूप उनके भाव,
कितना सरल उनके जीवन का बहाव,
फिर माटी में सहज ही मिलना हैं,
खुशी जीवित रहते सबके समक्ष बिखेरना हैं,
जगप्रताप के अद्भुत रंग असलियत में उकेरना हैं,
धरती ही स्वर्ग बन सके ईश्वर का ऐसा माध्यम बनना हैं।
- यति


