तमाशे की क्या तरकदारी?

सही संवाद से सुलझ गई उलझन सारी!

तकलीफ से रूह को किया मुक्त,

समझ रख किया चेतना को नियुक्त,

खुदमें महसूस किया भाव विरक्त,

न रहें मनुष्य किसी रिश्ते का आसक्त,

समृद्धि से संवरे उसके आनेवाला वक्त,

अखंडता से अमर हो भावों का समुद्र,

रिश्तों में बरकरार रहें मर्यादा और कद्र,

निदान मिलें पीड़ा से,

चुस्त रह सम्मलित हो मनुष्य खेल कूद क्रीड़ा में,

और पार्थिव शरीर की कृत्रिम तृष्णा,

सादगी से उसका उपाय सुझाता हैं मेरा कृष्णा,

त्यागना हैं बहकाने वाले भोग विलास,

कृष्णा का प्रेम ही केवल जग में खास,

पहनूं मैं पीले रंग के प्यारे लिबास,

हृदय में आपार प्यार कृष्णा जब देख मुझे करते सुहास।


- यति