उर्वर मस्तिष्क की कसरत पर ज़ोर,
भावनाओं को स्थिर करता हैं भोर!
देह में उमंग भरपूर,
दृष्टि से झलकता नायाब नूर,
सोखा हृदय ने नफे नुकसान का नीर,
सूक्ष्म कर अपनी तासीर,
बांधनी आशा की डोर,
नहीं भीतर रखना कुछ भी जो करे कमज़ोर,
सुनना हृदय कि अनूठी भाषा चाहे हो समीप शोर,
लगन से कार्य में होकर लीन,
सोचो कैसे उत्पन्न हो सबके लिए संसाधन तीन,
रोटी , कपड़ा और मकान,
आत्मीयता से सुसज्जित हो अपना जहान!
सुने होंगे आपने कथन अनेक,
कोशिकाओं पर असर करता विचार प्रत्येक,
हम जीवन के शुभ शिष्य,
कुशल मंगल हमारा भविष्य,
विचार हों ऐसे सबके सकारात्मक,
वर्तमान के कहर में यही एकमात्र निवारक!
कर्म से सुदृण हो नियति,
सद्बुद्धि से संतुलित रहे जीवन की गति,
कहती ये प्रेम से आपकी "यति"!
- यति
With Love and Light! ❤️
:)

