याद आएंगे तुम्हें वो किस्से,
वो मौन के पीछे की वायु,
तेज़ वर्षा में आंखों से टपकी वो बूंदे,
सन्नाटा खत्म होगा तब तक हम भी सिमट लेते,
निर्विकार , निर्विचार , निर्मलता निहित,
सबको अलविदा कर ,
कली के रूप में खिलेंगे,
ऐसी सुंगध बिखेरेंगे की मुरझाने के बाद भी लबों पर महकेंगे,
ये दुनिया थोड़ी अजीब हैं जनाब,
गम में दुनिया रखती नकाब,
ख़ुशी में नज़रे फेर भी लोग करते ऐतबार,
कभी संग सपरिवार जन्नत सजाने का ख़्वाब,
नहीं फिर भी करेंगे हम दरकिनार,
जीवन को जुआ समझे जो,
वो कैसे थामेगा अपनी पतवार ।
- यति
अलविदा :)
शुक्रिया


