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निर्विकार

याद आएंगे तुम्हें वो किस्से,

वो मौन के पीछे की वायु,

तेज़ वर्षा में आंखों से टपकी वो बूंदे,

सन्नाटा खत्म होगा तब तक हम भी सिमट लेते,

निर्विकार , निर्विचार , निर्मलता निहित,

सबको अलविदा कर ,

कली के रूप में खिलेंगे,

ऐसी सुंगध बिखेरेंगे की मुरझाने के बाद भी लबों पर महकेंगे,

ये दुनिया थोड़ी अजीब हैं जनाब,

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