अंश हुआ मेरा छोटा,
लगता हैं किस्मत का खेल बहुत खोटा,
यहां पैसे की गड्डी रखती जो मोटा,
उसने हुनरमंद को समेटा,
जो मेहनत कर मांगे अपना अधिकार,
उसको क्यूं सुननी पड़ रही धुत्कार?
क्या संभव नहीं ऐसे नवीन आविष्कार,
जो मिटा दें मानवता के ज़हन से अंधकार।
- यति


