वो याद तुम्हारी तन्हाई संग सहता हैं,

दिल उसका भी शायद कई दफा कहता हैं,

तुम्हारे चेहरे पर भी तो साफ ही दिखता हैं!

मन के किसी कोने में अब भी कहीं वो महफूज़ हैं?

वो यादों का सहारा,

वो हरफनमौला होने की ज्वाला,

वो राहों का तमाशा,

वो अंधेरे में प्रज्वलित आशा,

वो अपनेपन में घुली प्रेम की परिभाषा,

वो ख़्वाबों में भी हकीकत का ज़मीनी संतोष,

वो विचलित ना होने वाला अद्भुत होश,

माना पुरानी यादों में शायद ही कुछ अनोखा!

बहते अश्रुओं को समय ने सोखा,

जमकर तुम्हारे दोस्तों ने तुम्हें टोका,

वो नई सहेली जिसका अभी ही हुआ रोका,

उसने भी तुम्हें सरलता से बोला,

राज़ दिल का तुम्हारे समक्ष खोला,

प्रेम में सुकून हो तो नहीं देता वो धोखा,

वो दस्तक तो देता हैं,

तुम्हें दुरुस्त करने हेतु परीक्षा भी लेता हैं,

सुनो आहट तो रूह समझ कर लेता हैं,

मन समझ जाता कौन असल में अभिनेता हैं,

क्या दस्तक तुमने सुनी उसकी?

क्या बात तुम्हें फिर जमी खुदकी?

ज़ख्म को मरहम देने हेतु नज़रे झुकी उसकी?


- यति