निर्मल सा नारी मन,
इंसानियत उसका धन,
भीतर ममता समाई,
ख्यालों में अथाह गहराई,
शक्ति सत्य की उपासना कर पाई,
विजय से उसकी घर में खुशहाली आई!
जाने वो गलत तरीकों से होती सिर्फ तबाही,
बहनों की प्रगति की दे रही उसकी रूह गवाही!
अनैतिकता से उसने सदैव ही दूरी बनाई,
आलस्य की व्यक्तित्व से करता वो छटाई,
कभी मां संग भोजन बनाने में हाथ बटाया,
तो कभी घर के कामों का भी भार उठाया,
संसार को उसका उदारपन हमेशा ही रास आया,
नारी मन के पुरुषार्थ संग मेल ने उसे खास बनाया!
- यति


