प्रेम से परिपूर्ण उसका मुखड़ा गोल,
एकांत के क्षण होते बहुत अनमोल,
बच्चों में कल्पना का कौशल्य बढ़ें,
चाहती हूं मैं ऐसा साहित्य हम रचें,
नयनों की भाषा सदैव सुख पहुंचाएं,
अंदरूनी खूबियां निखरकर जगमगाआएं!
अध्यन से अनुसंधान में होती सदैव वृद्धि,
वेद तथा उपनिषद से लचीली होती बुद्धि,
करुणा से सुगम होती संपूर्ण सृष्टि,
व्यापकता को बरकरार रखे दृष्टि!
तकलीफ में मरहम बनें हमारी ममता,
सबको पहचान दिलाएं उनकी क्षमता!
उद्देश्य में समभाव समस्त रूप से रहे,
बचपन के स्मरण आए तो याद कर कहें!
रूह को प्राप्त हुआ सृजनशक्ति का स्नेह,
उन्मुक्त विचारों संग नम्य हो जाए देह,
आपार शक्ति रखे हमारा निर्मल हृदय!
अभ्यास से प्रगाढ़ हो प्रगति का ध्येय,
मद्धम ना हो सत्य का स्वर चाहे हो शोर,
आत्मावलोकन से मन हो सबका विभोर!
- यती


