तुम्हारी आंखों से बात करनी हैं,

हो ना हो एक निस्वार्थ मुलाक़ात करनी हैं,

अनदेखा हुआ जज़्बात तो नई शुरुआत करनी हैं,

लफ़्ज़ों को एहसासों की सौगात देनी हैं,

बात कुछ तो गहरी हैं,

लगता फिर कंठ में ठहरी हैं,

फिर ख्यालों को थमने की सलाह देनी हैं!

बेपरवाह होकर खुशियों को पनाह देनी हैं,

नम पलकों को हौले से सरकने की जगह देनी हैं,

मौजूदगी तुम्हारी मेरी सबसे बड़ी दवा हैं,

यादें इसलिए बुजुर्ग होकर भी ज़हन में जवां हैं,

दर्ज होते आनंद की गवाह ये मंद मंद हवा हैं!



- यति


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Dedicated to every unspoken lovestory ! ❤️