मुझे यकीन खुद पर,
रुचि को अभिव्यक्त करने में कैसा कर?
विभाजित नहीं होंगे खेलने वाले दो अमीर और गरीब घर!
थोड़ा शांत दिमाग से संभलकर,
सूक्ष्म दृष्टि विकसित इस क्षण अभी,
संदर्भ रखो किसी कण का भी!
कसते न मेहनत तथा हुनर पे तंज,
न रहे बाकी कोई रंज!
अपनी किस्मत के पाठ का पन्ना हम पलट,
हर गलतफहमी को भांप भूल उसे झटपट!
सत्य ही कुंजी, विरासत की पूंजी!
निष्ठा विजय स्वरूप गूंजी,
अंत के परे अनंत सी अविरल इच्छाशक्ति,
हनुमान की आध्यात्मिक अलौकिक भक्ति।
- यति


